कभी युवा इक परेशान,,,
कभी बुजुर्गों सा,,, चिंतित,,,
हर किरदार में नज़र आ जाता हूं,,,
मैं पर्दे का किरदार हूं,,,
हर परिस्थिति,, ख़ुशी- ग़म,,,
सब में मिल जाता हूं,,,
जो न मिल पाए खुद से,,,
उनको उन्हीं से मिलवाता हूं,,,
कभी उलझी गुत्थी को सुलझाता हूं,,,
कभी असहायों को उम्मीद सा नज़र आता हूं,,,
दुखियों की मुस्कुराहट बन जाता हूं,,,
मैं पर्दे का किरदार हूं,,,
हर किसी के जीवन में मिल जाता हूं,,,,
- ललिता ✍️

8 टिप्पणियाँ
Awsm lines
जवाब देंहटाएंThankyou 🤗🤗
हटाएंबहुत सुंदर भाव पिरोये है
जवाब देंहटाएंपर इतनी निराशा क्यों ?
धन्यवाद 🙏 संजय भास्कर जी,,
हटाएंAmazing....
जवाब देंहटाएंThankyou Aman 😇😇😇
जवाब देंहटाएंStunning poem
जवाब देंहटाएंthank you 🙏
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