अब ना किसी का विरोध चाहिए,,
ना ही मार्ग में अवरोध चाहिए,,
चाह हमें थी शहर में एक घर बनाने की,,
क्या पता था कि खून पसीने की कमाई भी,,
सांस खरीदने में चली जायेगी।
                                  - ललिता