Kshitij hindi



मैं कभी बच्चे- सा नादान,,,
कभी युवा इक परेशान,,,
कभी बुजुर्गों सा,,, चिंतित,,,
हर किरदार में नज़र आ जाता हूं,,,
मैं पर्दे का किरदार हूं,,,
हर परिस्थिति,, ख़ुशी- ग़म,,,
सब में मिल जाता हूं,,,
जो न मिल पाए खुद से,,,
उनको उन्हीं से मिलवाता हूं,,,
कभी उलझी गुत्थी को सुलझाता हूं,,,
कभी असहायों को उम्मीद सा नज़र आता हूं,,,
दुखियों की मुस्कुराहट बन जाता हूं,,,
मैं पर्दे का किरदार हूं,,,
हर किसी के जीवन में मिल जाता हूं,,,,
             -  ललिता ✍️