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"प्रेम"
"प्रेम"
ललिता
अप्रैल 23, 2020
"प्रेम"
जब तक प्रेम साध्य है,,,
तब तक निश्छल है,,,,
जिस दिन प्रेम साधन बना,,,
मज़ाक बन गया,,,, - ✍️ललिता
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2 टिप्पणियाँ
संजय भास्कर
19 मार्च 2021 को 5:24 am बजे
बहुत ही सुंदरता से भावों का प्रवाह बनाया है
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ललिता
19 मार्च 2021 को 10:51 am बजे
बहुत बहुत धन्यवाद संजय जी 🙏,,
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2 टिप्पणियाँ
बहुत ही सुंदरता से भावों का प्रवाह बनाया है
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद संजय जी 🙏,,
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