"तुम्हें मालूम है"
जब ख्वाबों के दरमियां,,,
इक नया ख्वाब सृजित हो,,,
जब अंग -तरंग भुजा-मस्तक,,,
की अठखेलियां,,प्रश्नोत्तरी हो,,,
जब सब समन्वित हो,,,
एकाग्रता में,,
चित्त ख्वाबों में उलझा रहे,,,
तो इच्छा का एक पड़ाव पार हो जाता है,,, ✍️- ललिता
Copyright © 2020 क्षितिज All Right Reseved
2 टिप्पणियाँ
बहुत सुंदर..👌👍
जवाब देंहटाएंधन्यवाद! 🙏🤗😇
हटाएं