"ख्बाव के इंतजार में"

इक और ख़्वाब बुने जा रही हूं ...

मैं हक़ीक़त को भी ...

किस्मत कहे जा रही हूं ...

मतवाली हवा सी,,,

तुम्हारी ओर खिंचीं जा रही हूं,,,

ख्बाव के इंतजार में,,,

नये ख़्वाब बुने जा रही हूं,,,- ललिता ✍️🙏