स्वर्णिम प्रकाश के मध्य मधुरिम कल्पना है क्षितिज,,,,
भूमि- अम्बर का मिलन है क्षितिज,,,,
प्रकृति पुरुष का जीवन है क्षितिज,,,,
प्रभात का पीत सिंदूर ,,,
तो संध्या का लाल महावर है क्षितिज,,,
एक तपस्वी की कठोर क्रिया,,,
तो संचालन की प्रक्रिया है क्षितिज,,,,
पक्षियों का मनोरम राग है क्षितिज,,,
ऊषा, प्रत्यूषा का अनुराग है क्षितिज,,,
प्रेम की प्ररेणा और पक्षपात है क्षितिज,,,
मन में ठहरा उन्माद है क्षितिज,,,,
संयोग और वियोग का आभास है क्षितिज,,,
दिनकर का दिवस,,,
 तो चन्द्रमा का शीतल उल्लास है क्षितिज,,,
विपरीत गुणप्रेमी का विश्वास है क्षितिज,,,
संसृति और संस्कृति का निर्माण है क्षितिज,,,
जीवन का आकार,,,मरण का उकार है क्षितिज,,,
इस नवांकुरित कवियित्री की प्ररेणा है क्षितिज,,,,
"ललिता" की कलम का नवसंचार है क्षितिज,,,,,,✍️