"चुप रहना "
कुछ ना कहना,,,
कह कर तुम पछताओगे,,,
चींटी होकर जो हाथी से टकराओगे,,,
मुंह जो खोला तुमने,,,
चाहें हो वो भूख-प्यास,,,
या हो तुम्हारा तीखा कटाक्ष,,,
बस याद रखो पैरों तले,,,
कुचले तुम ही जाओगे,,,
मानो ये बात मेरी,,,
बच्चे-माता व भाई-बंधु,,,
सब हो सहोदर,,,
सब सभी के सहचर,,,
आपस में ही टकराओगे,,
तो हर क्षण मारे जाओगे,,, - ललिता ✍️
कुछ ना कहना,,,
कह कर तुम पछताओगे,,,

4 टिप्पणियाँ
ललिता मैम , आपकी रचना समसामयिक परिवेश की मील का पत्थर है । परन्तु समय की मांग चुप रहना नहीं आवाज़ उठाना है , इसलिए आप इसका दूसरा पार्ट अवश्य लिखें ।
जवाब देंहटाएंउत्कृष्ट रचना 🙏🙏
शुक्रिया मित्र 🙏✍️,,, मैं जल्द ही इस कविता का अगला भाग लिखूंगी,,, आप का आभार 🙏,,, please share the blog 👇 https://Hindi Pranjal.blogspot.com
हटाएंWaah golu....
जवाब देंहटाएंShukriyaaa 🙏 please share https://Hindi Pranjal.blogspot.com
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